ओ काली-काली रातों में
जाग-जाग कर मैं तुझे
याद करता हूँ ओ मुठियारे
आसमान का चाँद मुझे
देखता ही रह गया
तारे भी मुझे चिढ़ाने लगे
क्यों मिलने नहीं आई
बहाने बनाकर
ओ काली-काली रातों में
जाग-जाग कर मैं तुझे
याद करता हूँ ओ मुठियारे
जो गुलाब तूने मुझे दिया था
अब वो भी मुझे खराब लगता है
शराब भी अब मुझे
छोड़ती नहीं ओ सोहनी
नींद मेरी उड़ चुकी है
आँखों में नींद नहीं रहती
और कैसे जिऊँ मैं
ओ सोहनी
मैं मझे का जट्ट हूँ
तू पल भर में ही भूल गई
तूने मेरे
छज्जे के दीये भी बुझा दिए
क्यों मिलने नहीं आई
बहाने बनाकर
ओ काली-काली रातों में
जाग-जाग कर मैं तुझे
याद करता हूँ ओ मुठियारे
तुझसे प्यार किया
तो सबसे दुश्मनी मोल ले ली
अब कोई खैर
नज़र नहीं आती ओ सोहनी
कभी नज़रों से मिलती है
कभी नज़रें चुरा लेती है
क्यों अब मेरी
परवाह नहीं करती ओ सोहनी
तेरे पीछे अब ये जट्ट
कभी भी बड़ा कदम उठा लेगा
कभी तो हमारे गाँव आ
ओ लड़की
क्यों मिलने नहीं आई
बहाने बनाकर
ओ काली-काली रातों में
जाग-जाग कर मैं तुझे
याद करता हूँ ओ मुठियारे