Jalsa 2.0

Lyrics

Jalsa 2.0

by Satinder Sartaj

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चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया
हमारे आँगन में भी आया
चाँद-सा मुखड़ा मेहमान था

हो…

चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया
हमारे आँगन में भी आया
चाँद-सा मुखड़ा मेहमान था

रिशमा ने, रिशमा ने
दूधिया-सी
पोशाक पहन रखी थी
तारों को पुकारा उसने
वो तो बिल्कुल अलग ही जहाँ थी

चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया, जश्न सजाया
जश्न सजाया

जश्न सजाया, जश्न सजाया

प्यार वाले गाँव की
महकती हुई सरहदें
आगे चंदन की देहली
और शीशे-सी चौखट है

प्यार वाले गाँव की
महकती हुई सरहदें
चंदन की देहली
शीशे-सी चौखट है

दिलों वाले कमरे में
नूर होगा ही
हाँ, ज़रूर होगा
क्योंकि इश्क़ रोशनी की चीज़ है

चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया, जश्न सजाया
हो जश्न सजाया

जश्न सजाया
होए होए होए होए
अरे बल्ले बल्ले बल्ले बल्ले

सुना है तुम्हारा
काले रंग का ताबीज़
गीतों को सँभाले हुए है
तुम माही हो सरताज के

हो…

सुना है तुम्हारा
काले रंग का ताबीज़
गीतों को सँभाले हुए है
तुम माही हो सरताज के

अगर हो तो ऐसी ही हो
सच्ची मोहब्बत
यही प्यार की रीत है
लोग इसी को नवाज़ते हैं

चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया
हमारे आँगन में भी आया
चाँद-सा मुखड़ा मेहमान था

होए…

जश्न सजाया
होए… हे…

चाँदनी ने पूनम की रात
जश्न सजाया, जश्न सजाया
जश्न सजाया…