कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
तुझ पर ही डोरियाँ टिकी हैं, मेरी जान
एक मासूम सी आस है
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
सूरज को हमारी फ़िक्र है
शामें बेफ़िक्र सी हैं
ऊपर से सिर पर कोई नाम नहीं
मंज़िलों और मुक़ामों के
न ये सफ़र हैं, न सैर हैं
न पंखों पर हैं, न तैरने पर
अब कुछ ऐसा कर लें
कि सब ख़ैरियत में बदल जाए
कि तेरे हाथों में
मैंने कभी कसाव नहीं देखा
तुझ पर ही डोरियाँ टिकी हैं, मेरी जान
एक मासूम सी आस है
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
काश तू सपनों के लिए
थोड़ा संजीदा हो जाए
ज़िंदगी के साथ इस तरह
ताश मत खेल
तेरा दिल डरता क्यों नहीं
शक-शुबह करता क्यों नहीं
हमसे ही इतने परदे क्यों हैं
उमंगों को तो तू हर बार
इन हँसी में न मोड़ दे
तुझ पर ही डोरियाँ टिकी हैं, मेरी जान
एक मासूम सी आस है
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
उम्मीदों से लंबी कोई
हूक नहीं होती
इसे संभाल कर रखना चाहिए
ये बड़ी नाज़ुक और कोमल होती है
इसकी ख़ूबी बेमिसाल है
दिलों की वीरानी भी इसी से है
मुनाफ़ा हो या नुकसान
दोनों इसी में हैं
मगर ऐ सरताज, ये हुनर है
खुशियाँ बाँटने का
तुझ पर ही डोरियाँ टिकी हैं, मेरी जान
एक मासूम सी आस है
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं
कि हमें नहीं पता
ये रास्ते किस ओर जाते हैं