Raseed

Lyrics

Raseed

by Satinder Sartaj

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बेकरारियाँ कीमती होती हैं
फ़ासलों से ही इत्मिनान पैदा होता है
सब फ़िदा हो जाते हैं, तू ख़ुद निसार हो जा
उसे पता चले तो उसे गुमान हो

दिल, हार भी सही
ख़ुद को वार भी सही
यहाँ हारने वालों की
शान अक्सर ऊँची होती है

ऐसी आशिक़ी कर ऐ सरताज शायर
कि कोई हैरान हो जाए और क़ुर्बान हो जाए

ऐसी इश्क़-बाज़ार की रीत देखी है
लाखों सामने हैं, मगर कोई रसीद नहीं
जिसने इस दुनिया में क़दम रखा
उसकी कोई मातम नहीं, उसकी कोई ईद नहीं

इश्क़ जितना आसान कुछ भी नहीं
और इश्क़ जितना मुश्किल और शदीद कुछ भी नहीं
ऐ शायर सरताज, उसे बाहर मत ढूँढ
अंदर ही तलाश कर, मिलने की उम्मीद छोड़ दे

मोहब्बतों के ये लुत्फ़ ही अलग होते हैं
जब दर्द हो, तब भी मुस्कुराया जाता है

कभी हाथ खोलकर दुआ माँगते हैं
कभी दर्द में मुट्ठियाँ भींच लेते हैं
कभी पत्तों से पूरी नज़्म कह जाते हैं
कभी ख़ुद को भी अपना दुख नहीं बताते

यही इश्क़ के दो उसूल हैं, ऐ सरताज शायर
महबूब जैसा कहे, वैसा ही बस जाना होता है

ये जो उदास दिखता है, जो ग़मज़दा है
जो दिल टूटन में चूर-चूर दिखता है
इससे पूछो कि दिलबरी में क्या पाया
कहेगा—अब दिलबर में ही ख़ुदा नज़र आता है

सबके ही इश्क़ के दिए जले हैं
इन्हीं से मोहब्बतों में नूर नज़र आता है
कहाँ खड़े हो, ये सोचो ऐ सरताज शायर
इश्क़ का सफ़र अभी बहुत दूर नज़र आता है

दो कश्तियों में पैर रखने से क्या हासिल
या तो जुदाई बन जा, या मिलन बन जा

हौसला करके एक ही तरफ़ हो जा
या तो तिनका बन जा, या कमाल बन जा

या तो अँधेरों को सीने से लगा ले
या किसी चेहरे की रौनक बन जा

लोगों को तुझ पर रश्क हो, ऐ सरताज शायर
ऐसा बन कि लोग तुझे मिसाल की तरह याद रखें
लोग तुझे मिसाल की तरह याद रखें
लोग तुझे मिसाल की तरह याद रखें