Sai

Lyrics

Sai

by Satinder Sartaj

Released: May 2015 • 1 Views

कोई अली कहे, कोई वली कहे

कोई कहे दाता, सच्चे मालिक को

मुझे समझ न आए, क्या नाम दूँ

इस गोल चक्की की चालों को

रूह का असली मालिक वही मानीए जी

जिसका नाम लें तो सुरूर हो जाए

आँखें खुली हों तो महबूब दिखे

आँखें बंद हों तो हाज़िर हो जाए

कोई सोते वक्त, कोई नहाते वक्त

कोई गाते वक्त तुझे याद करता

एक नज़र तू मेहर की मार साईं

सरताज भी खड़ा फ़रियाद करता

साईं वे, हमारी फ़रियाद तेरे लिए

साईं वे, बाँह पकड़ नाव पार लगाने के लिए

साईं वे, मेरे गुनाहों को छुपा लेना

साईं वे, हाज़िर-नाज़िर तू खुद आ जाना

साईं वे, ग़रीबों की ओर भी फेरा डालना

साईं वे, सबके मिट्टी जैसे बोल पूरे करना

साईं वे, हक़ में फ़ैसले सुनाना

साईं वे, धीरे-धीरे कमियाँ घटाना

साईं वे, मुझे मेरे अंदर से निकालना

साईं वे, गिरें तो पकड़कर उठाना

साईं वे, भरोसे की परीक्षा न लेना

साईं वे, कठिन–सरल राहों से निकालना

ओ साईं वे, कला को और चमकाना

साईं वे, सुरों को सही जगह बिठाना

साईं वे, ताल में चलना सिखाना

साईं वे, साज़ रूठ जाएँ तो मनाना

साईं वे, इनसे वादा भी गहरा करना

साईं वे, अक्षरों का मेल कराना

साईं वे, किसी गीत की लौ कानों तक पहुँचाना

साईं वे, शब्दों का साथ भी निभाना

साईं वे, नग़मे को पकड़कर जगाना

साईं वे, शायरी में असर भरना

साईं वे, जज़्बे की बेल को बढ़ाना

साईं वे, घूँट-घूँट सबको पिलाना

साईं वे, इश्क़ का नशा भी चढ़ाना

साईं वे, सिर से ख़यालों को सँभालना

साईं वे, तारों तक देश ले जाना

साईं वे, सूफ़ियों की तरह नचाना

साईं वे, हम सजे बैठे हैं चाव-चाव से

साईं वे, थोड़ी-बहुत अदा भी सिखाना

साईं वे, मेरे साथ-साथ तू भी गाना

साईं वे, सरताज की लाज बचाना

साईं वे, भटके हुओं को उँगली पकड़ाना

साईं वे, आगे बढ़कर रास्ता रोशन करना

साईं वे, अंधेरों में पलड़ा न चुराना

साईं वे, ज़िंदगी के बोल पुकारना

साईं वे, फ़िक्रों को हवा में उड़ाना

साईं वे, सारे लगे दाग भी धुलवाना

साईं वे, भीगी-भीगी आँखों को सुखाना

साईं वे, दिलों के गुलाब महकाना

साईं वे, बस प्रेम की पट्टी पढ़ाना

साईं वे, पाक-साफ़ रूहों को मिलाना

साईं वे, बच्चों की तरह समझाना

साईं वे, बुरे कामों से डाँटकर हटाना

साईं वे, खोटों को खरों में मिलाना

साईं वे, लोहे को पारस से रगड़वाना

साईं वे, मेहनत का मोल भी दिलाना

साईं वे, मरे ज़मीर को मंडी में न बिकने देना

साईं वे, अब देर न लगाना

साईं वे, दरों पर खड़े हैं, खैर डालना

साईं वे, मेहरों वाली बारिश भी बरसाना

साईं वे, अक़्लों के घर भर देना

साईं वे, घमंड के गुंबद गिरा देना

साईं वे, आग जैसे हौसले भर देना

साईं वे, अंबरों से सोच मँगवाना

साईं वे, खुद आवाज़ मारकर बुलाना

साईं वे, अब हमें पास भी बिठाना

साईं वे, अपने ही रंग में रंग देना

साईं, मैं हर वक्त साईं-साईं करता रहूँ

साईं वे, तोते की तरह बोल भी रटाना

साईं वे, आत्मा का दीपक भी जलाना

साईं वे, अनहद नाद छेड़ जाना

साईं वे, कोई रूहानी ताल छेड़ जाना

साईं वे, सच्चा सरताज ही बना देना